सफलता की रफ्तार

सफलता की रफ्तार


*ठोकरें* अपना काम करेंगी,
तू *अपना काम* करता चल ...
वो गिराएंगी *बार-बार,* 
तू उठकर फिर से 
*चलता चल ...!!*

हर वक्त, 
*एक-ही-रफ्तार* से,
दौड़ना कतई जरुरी नहीं तुम्हारा ...
*मौसम-की-प्रतिकूलता* हो, 
तो बेशक 
*थोड़ा सा ठहरता चल ...!!*

अपने से *भरोसा* न हटे,
बस ये ध्यान रहे तुम्हें सदा ...
*नकारात्मक ख्याल* 
दूर रहे तुझसे,
उनसे 
*थोड़ा संभलता चल ...!!*

*पसीने-की-पूंजी* लूटाकर,
दिन रात मंजिल की राह में ...
*दिल-के-ख़्वाबों* को,
जमीनी *हकीकत* में बदलता चल ...!

एक दिन में नहीं लगते,
किसी भी पेड़ पर फल 
कभी भी ...
*पड़ाव-दर-पड़ाव* ही सही,
अपनी 
*मंजिल-की-ओर*
 सरकता चल।

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